''Wel-Come''

एक "रतन" की खातीर ........"कविता"

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  • Friday, April 27, 2012
  • विजयपाल कुरडिया
  • लेबल: , ,
  • "सचिन" को  "कांग्रेश" द्वारा "राज्यसभा" में भेजे जाने पर एक छोटी सी "कविता" लिखी हे.....वेसे मुझे ज्यादा तो आता नहीं पर जो मन में उमड़ पड़ा  उसे "कागज" पे लिखता चला गया ;-)

    राजनीती भी क्या-क्या
    गुल "खिला" देती हे ,
    "में केवल खेल पर ध्यान  दूंगा"
    कहेने वाले को सबकुछ "भुला" देती हे !
    एक "रतन" की खातीर

    यह सारा "मेल" मिलाया हे,
    "रतन" को "रतन" मिल पाये                          
    इसलिए तो सारा "खेल" खिलाया हे !!
    पर उस "रतन" का क्या ?
    जनता ने जिसे तुमको "पहनाया" हे ,
    भूल गये जनता ने तुमको
    "भगवान" बनया हे !!!
    पर आज एक "रतन" की खातिर
    तुमने जनता की रग को "दुखाया" हे
    यह लिखते वक्त भी
    दिल "रो" रहा हे,
    क्या "भगवान" भी
    सच में "सो' रहा हे  !!!
                                     ;-) वि"जय"

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