''Wel-Come''

आज भी याद हे........वो 60 घंटे

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  • Friday, November 26, 2010
  • विजयपाल कुरडिया
  • लेबल:
  • बात तब की हे जब में 11वि क्लास में पढ़ता था |बात 26 नवम्बर 2008 की हे ,पूरी दुनिया का ध्यान LHC महाप्रयोग की तरफ था |मिडिया,प्रिंट-मिडिया,गली-मोह्हले सभी में एक ही बात चल रही थी-LHC महाप्रयोग का परिणाम क्या होगा|उस दिन भारत ओर इंग्लेंड के बिच एक दिवसये मैच चल रहा था| लोगो का ध्यान उस ओर भी था|
         शाम का समय था ,लगभग 8-9 बजे |सभी न्यूज़ चेनलो पर एक ही खबर चल रही थी,लेकिन खबर सुबह की तुलना में पूरी तरह बदल चुकी थी|खबर थी-मुंबई पर आतन्कारी हमला|

                चारो ओर हो-हला| जिन्दगी जैसे थम सी गयी |बाद में पता चला कि 10 हमलावर कराची से नाव के रास्ते मुंबई में घुसे. इस नाव पर चार भारतीय सवार थे जिन्हें किनारे तक पहुंचते पहुंचते ख़त्म कर दिया गया. रात के तक़रीबन आठ बजे थे, जब ये हमलावर कोलाबा के पास कफ़ परेड के मछली बाज़ार पर उतरे. वहां से वे चार ग्रुपों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी मंज़िलों का रूख किया. कहते हैं कि इन लोगों की आपाधापी को देखकर कुछ मछुवारों को शक भी हुआ और उन्होंने पुलिस को जानकारी भी दी. लेकिन इलाक़े की पुलिस ने इस पर कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी और न ही आगे बड़े अधिकारियों या खुफिया बलों को जानकारी दी.


    उस वक्त दहल उठा मुंबई-इस हमले की पहली गोली रात के तक़रीबन साढ़े नौ बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर सुनाई दी|  मुंबई के इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन के मेन हॉल में दो हमलावर घुसे और अंधाधुंध फ़ायरिंग शुरू कर दी. इनमें एक मुहम्मद अजमल क़साब था जो हमलों के दौरान गिरफ्तार इकलौता हमलावर है. दोनों के हाथ में एके47 राइफ़लें थीं और पंद्रह मिनट में ही उन्होंने 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 109 को ज़ख़्मी कर दिया.
    लेकिन आतंक का यह खेल सिर्फ़ शिवाजी टर्मिनस तक सीमित न था. दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ड कैफ़े[कोलाबा] भी उन चंद जगहों में था जो तीन दिन तक चले इस हमले के शुरुआती निशाने थे. यह मुंबई के नामचीन रेस्त्रांओं में से एक है, इसलिए वहां हुई गोलीबारी में मारे गए 10 लोगों में कई विदेशी भी शामिल थे जबकि बहुत से घायल भी हुए. 1871 से मेहमानों की ख़ातिरदारी कर रहे लियोपोल्ड कैफ़े की दीवारों में धंसी गोलियां हमले के निशान छोड़ गईं. 10 :40 बजे विले पारले इलाक़े में एक टैक्सी को बम से उड़ाने की ख़बर मिली जिसमें ड्राइवर और एक यात्री मारा गया, तो इससे पंद्रह बीस मिनट पहले बोरीबंदर में इसी तरह के धमाके में एक टैक्सी ड्राइवर और दो यात्रियों की जानें जा चुकी थीं. तकरीबन 15 घायल भी हुए.
    लेकिन आतंक की कहानी यही ख़त्म हो जाती तो शायद दुनिया मुंबई हमलों से उतना न दहलती. 26/11 के तीन बड़े मोर्चे थे मुंबई का ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस. जब हमला हुआ तो ताज में 450 और ओबेरॉय में 380 मेहमान मौजूद थे.
    हमलों की अगली सुबह यानी 27 नवंबर को ख़बर आई कि ताज से सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है, लेकिन जैसे जैसे दिन चढ़ा तो पता चला हमलावरों ने कुछ और लोगों को अभी बंधक बना रखा है जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं. हमलों के दौरान दोनों ही होटल रैपिड एक्शन फोर्ड (आरपीएफ़), मैरीन कमांडो और नैशनल सिक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) कमांडो से घिरे रहे. एक तो एनएसजी कमांडो के देर से पहुंचने के लिए सुरक्षा तंत्र की खिंचाई हुई तो हमलों की लाइव मीडिया कवरेज ने भी आतंकवादियों की ख़ासी मदद की. कहां क्या हो रहा है, सब उन्हें अंदर टीवी पर दिख रहा था.
    तीन दिन तक सुरक्षा बल आतंकवादियों से जूझते रहे. इस दौरान, धमाके हुए, आग लगी, गोलियां चली और बंधकों को लेकर उम्मीद टूटती जुड़ती रही और न सिर्फ़ भारत से सवा अरब लोगों की बल्कि दुनिया भर की नज़रें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी रहीं.उधर, दो हमलावरों ने मुंबई में यहूदियों के मुख्य केंद्र नरीमन पॉइंट को भी कब्ज़े में ले रखा था. कई लोगों को बंधक बनाया गया. फिर एनएसजी के कमांडोज़ ने नरीमन हाउस पर धावा बोला और घंटों चली लड़ाई के बाद हमलावरों का सफ़ाया किया गया लेकिन एक एनएसजी कमांडो की भी जान गई.  बाद में सुरक्षा बलों को वहां से कुल छह बंधकों की लाशें मिली.29 नवंबर की सुबह तक नौ हमलावरों का सफाया हो चुका था और अजमल क़साब के तौर पर एक हमलावर पुलिस की गिरफ्त में था. स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ चुकी थी|लेकिन इस हमले के ज़ख्मों को भूल तो कतई नहीं सकती.
    26/11 के आंकड़े-
                        175 लोग मारे गये|
                        300 लोग घायल हुवे|
                        17 सुरक्षाकर्मी शहीद हुवे|
                        22 विदेसी मरे |

      क्या आप जानते हे-
    1.हमले के बाद महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर लिखा की टी वी चेनलो पर हमले का सजीव प्रसारण देख कर वह इतने सहम गये थे की सोने से पहले अपने सिराहने  लाइसेनस सुधा रिवोल्वर रखने लगे थे|
    2.24 साल 4100 आतन्कारी हमले हुवे
    हे अब तक देश में |
    3 .12540 लोग मारे गये 2004 तक|
    4.56 आतन्कारी गुट भारत में सकीर्ये  हे|
    5.इस हमले में जीवित पकड़ा गया एक मात्र आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को पकड़ने वाले "तुका राम ओम्बले" के पास उस समय हथियार के नाम पर सिर्फ लाठी थी,जबकि कसाब के पास एक-47 |
    6.इस हमले में 9 आतन्कारियो को मारने के लिए 36,००० गोलियों का प्रयोग किया गया| 

    किसी शायर ने ठीक ही  कहा हे--
                    दबा के चल दिए यु कब्र में दुवा न सलाम,
                    जरा से देर में क्या हो गया जमाने को

    अब कुछ तस्वीरे उस समय की-






























     आवो अब  इस हमले में मारे गये लोगो की श्रदांजली दे--

    3 Comment Here:

    1. NEHA MATHEWS said...
    2. वह बहुत बुरा दिन था |
      हमले में मारे गए सभी लोगो को श्रदांजलि व देश की रक्षा करने वाले वीरों को शत शत नमन |

    3. डॉ॰ मोनिका शर्मा said...
    4. बहुत अच्छी पोस्ट विजयपाल ... धन्यवाद
      हालाँकि उस दिन को याद कर हर हिन्दुस्तानी के मन टीस ही उठती है.... देश के उन सभी सपूतों को मेरा भी नमन......श्रदांजलि

    5. SHRAWAN RAM THOLIYA said...
    6. very good

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