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ले लो मैया, ले लो भैया

Thursday, October 7, 2010

मेरा गांव "छोटी-खाटू":-इतिहास से वर्तमान तक....[ "CHHOTI KHATU" HISTORY TO PRESENT]

वर्तमान में छोटी-खाटु राजस्थान के नागौर जिले के डीडवाना तहसील में स्थित है |
ऐतिहासिक लेखा जोखा:- वर्तमान में जंहा गांव बसा है,एक समय वंहा हरा-भरा जंगल था तथा प्राचीन गांव इसके दक्षिण की और पथरीली जमीन पर बसा था | सन 1968 में गांव में भयानक बाढ़  आई | जब पानी का वेग रेतीले धोरों  को काटते हुवे आगे  बढ़ा तो अपने रास्ते से जमीन की बहुत बड़ी परत  हटाता गया| बाढ़ शांत होने पर लोगो ने देखा की उस मार्ग के नीचे एक प्राचीन गांव के अवशैष यत्र-तत्र उभर आये है|

                                      "पृथ्वीराज रासो" में इस गांव का "खटु वन" के नाम से उल्लेख है पृथ्वी राज शिकार के लिये भी यंहा आया करते  थे,ऐसा आलेख है| छोटी-खाटू के पास ही एक पर्वत पर पृथ्वीराज का किला,रामनिवास सरोवर व पर्वत के ऊपर 500 फुट गहरा कुवां है,जो आज भी विद्यमान है|
प्राचीन गांव के महत्वपूर्ण स्थल:-
 1 .नाथ सम्प्रदाय का मठ :-प्राचीन मूर्तियों की द्र्स्टी  से महत्वपूर्ण स्थल है| इस मठ में 2000 वर्ष पुराणी गणेश जी की मूर्ति है|
2 .रावला:-गांव के मध्य का स्थल जो जमीन से थोरा ऊपर उठा है,यंहा बहुत सारी मुर्तिया है जो बाहार से दिखयी देती है|
3 .फ़ूल बावङी:-यह बावङी 130 वर्ष पूर्व जमीन से खोदकर निकली गयी थे| यह बावङी 'T' आकर की है| इसमे नीचे जाने के लिये सीङीया  लगी है,इन सीङीयो पर सात दरवाजे है|यंहा दिग्पालो,सूर्य,कुबेर व अन्य देवो की मुर्तिया हैं|
                                  गांव का एक दूसरा नाम "षट-कूप" भी था कहते  है की गांव में 6 विशाल बावङीया थी|4 बावङीया तो अभी भी गांव के चारो कोनो पर स्थित है|बाकि 2 शायद भूगर्भ में समा गयी है|
                                   सन 1952 तक यहाँ केवल एक सरकारी मिद्दिल स्कूल था| 1952 में इस गँवा के मोती लाल चोधरी  विधायक बने| धीरे-धीरे गांव अनाज व ऊन  की मंडी के कारण चारो और प्रसिद्ध होने लगा| यंहा एक उन की मिल भी लगी,जो अब दुर्भाग्य वस बंद पङी है|
गांव की वर्तमान स्तिथि:-   
1 .गांव में एक लम्बा-चोङा बाजार है,जहाँ आस-पास के गांवो के लोग खरीदारी करने आते हैं|
2 .गांव के उत्तर में हिमालय का आभास करा देने वाला पहाङ है| इस पर 2 मन्दिर व 1 मस्जिद है|इसके पास में निर्भाराम बाबा की बगीची है,जहाँ उन्होने जीवित समाधी ली थी,यंहा आसाढ सुधि पूर्णिमा को प्रति वर्ष मेला लगता है |
3 .अमेरिका प्रवासी भंवरलाल नवल द्वारा निर्मित "अस्पताल" में दूर-दूर के गांवो के लोग इलाज करवाने के लिये आते है|
4 .गांव का चुना उद्योग पत्थर उद्योग दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं |
5 .गांव में लोहे व ल़कङी का काम उच्च स्तर का किया जाता है|
6 .आज गांव में 15 सरकारी व गैर सरकारी विधालय चल रही है|
7 .गांव में अनाज की तीन मंडिया हैं,जंहा आस-पास के लोग अपनी फसल बचने आते है|
8 .गांव में एक पुलिस चोकी भी है|
9 .गांव में रेल-वे स्टेशन तथा बस स्टेशन भी है|
10 .गांव में एक पुस्तकालय भी है,जिसका नाम है -"श्री छोटीखाटू हिंदी पुस्तकालय"                                                         जिसका विवरण में अगली पोस्ट में दूंगा|
                                                                                                                              तो हैं न मेरा गांव एक "आदर्श गांव"
ले लो मैया, ले लो भैया