''Wel-Come''

जाना था जापान चीन पंहुच गये ना................[AMAZING DISCOVERY ].....PART 1

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  • Monday, June 13, 2011
  • विजयपाल कुरडिया
  • लेबल: , ,
  • एक  पूरानी फिल्म का गाना हे -जाना था जापान चीन पंहुच गये ना......यानि काम कुछ और करना चहाते  थे और हो गया कुछ और ऐसा विज्ञानं  जगत की बहुत से खोजो के सात भी हुवा ऐसे ही कुछ खोजो के के बारे में आपको बताने का प्रयास  आज में TECH WORLD पर करूंगा माना आवश्यकता अविष्कार की जननी  हे, लेकिन दुनिया में कई ऐसे उत्पाद रहे हे , जिनकी खोज जरूरतवश  न हो कर अनायास हुयी | मतलब आविष्कार तो हुवा लेकिन बायचांस |



    1.कोक : सिरदर्द की दवा से बना कोल्ड ड्रिंक                                            
                अटलांटा के मशुर फार्मिस्ट पेंबरटन अपने सिरदर्द से परेशान रहा करते थे |एक दिन उन्होंने सिरदर्द से छुटकारा पाने के लिए कई रसायनों का मिश्रण तेयार किया | इस मिश्रण से उनका सिरदर्द तो दूर नहीं हुवा लेकिन एक ऐसे द्रव्य का आविष्कार जरुर हो गया जिनको सोडे के साथ मिलाने से स्वादिस्ट पेय बनाया जा सकता हे | पेंबरटन ने कई सालो तक उस द्रव्य को अपनी दुकान में अक दवाई  की तरह बेचा | बाद में यही दवाई परिष्क्र्त होती हुयी कोकाकोला के रूप में बिकने लगी |  

    2. आतिशबाजी : रसोइये ने किया कमाल                                              
                    आतिशबाजी की खोज भी कम दिलचस्प नहीं हे | माना जाता हे की 2000 साल पहले चीन के रसोई घरो  में चारकोल, सल्फर और नमक आदि का इस्तेमाल किया जाता था | एक रसोइये ने एक दिन इन सभी का मिश्रण बनाया और देखा की उसमे आग लग गई हे और रंगबिरंगी रोशनी निकली | इसके बाद उसने बांस के खोल में इन मिश्रणों को भरा तो वह एक धमाके के साथ फट गया और रोशनी प्रगट हुयी | बस फिर क्या था पटाके फूटने ही थे |     









     3. माइक्रो वेव ओवन : मजाक का ओवन                                                         
                             माइक्रोवेव की खोज भी एक संयोग ही कहा जा सकता हे  |हुवा यूँ की अमेरिका  के इंजिनियर पर्सी स्पेंसर एक दिन एक वेक्यूम नाली के साथ प्रयोग कर रहे थे , जिसका नाम मेग्नेट्रोन था | अपने प्रयोग के दोरान स्पेंसर ने पाया के उनकी जेब  में रखी केन्डी पिगल रही हे | अब उन्होंने अपनी जब में कुछ पोपकोरन रख लिए | उन्होंने पाया की पोपकोर्न भी फूलने लगे हे | स्पेंसर को लगा की यह तो बड़े कम की चीज हो सकती हे \ स्पेंसर ने 1947 में एक ऐसा मोडल बनाया जो मायक्रोवेव ओवन के रूप में लोगो के बिच में पंहुचा | 

    अगर आप इस सीरिज का पार्ट 2 पढना चहाते हे तो इस पेज को बुकमार्क कर ले या इस ब्लॉग को फोलो  कर  ले |


     

    1 Comment Here:

    1. डॉ॰ मोनिका शर्मा said...
    2. Rochak Jankari....

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